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Begusarai Flood: गंगा बाया नदी का जमींदारी बांध टूटा, आबादी की ओर बढ़ा पानी; कई गांवों में बाढ़ का खतरा

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बेगूसराय के बछवाड़ा में गंगा बाया नदी का जमींदारी बांध टूटने से बाढ़ का पानी निचले इलाकों की ओर फैल रहा है। खेत जलमग्न हैं और कई घरों तक पानी पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।

बेगूसराय, 24 अगस्त। बिहार के बेगूसराय में गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ का खतरा और गंभीर हो गया है। बछवाड़ा प्रखंड के झमटिया घाट के समीप सोमवार को गंगा बाया नदी का जमींदारी बांध टूट गया। बांध में कटाव और पानी के दबाव के बाद बड़ी मात्रा में पानी निचले इलाकों की तरफ फैलने लगा। इससे आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

बांध टूटने की खबर फैलते ही आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पहले से ही गंगा के बढ़े जलस्तर और जलजमाव से परेशान ग्रामीणों के सामने अब आबादी वाले हिस्सों में पानी पहुंचने का खतरा पैदा हो गया है। कई स्थानों पर खेत पहले से पानी में डूबे हुए हैं और बांध टूटने के बाद पानी का दायरा और बढ़ने की आशंका है।

जानकारी के मुताबिक झमटिया घाट के आसपास गंगा के बढ़े जलस्तर का दबाव लगातार बना हुआ था। पानी के दबाव के कारण बांध कमजोर हुआ और सोमवार तड़के इसके टूटने की सूचना सामने आई। इसके बाद पानी तेजी से निचले हिस्सों में फैलने लगा।

जल संसाधन विभाग की टीम को रात में ही बांध की स्थिति पर नजर रखने के लिए लगाया गया था। विभागीय अधिकारी के अनुसार रात करीब 12 से 1 बजे के बीच टीम ने इलाके में बांध की पेट्रोलिंग की थी। इसके बाद लगभग तीन बजे बांध के कमजोर होने और पानी के दबाव बढ़ने की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही संबंधित विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने का प्रयास शुरू किया।

बछवाड़ा के सीओ प्रीतम कुमार गौतम, बीडीओ डॉ. अमित कुमार और जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष कुमार सहित विभागीय कर्मी मौके पर पहुंचे। बांध की मरम्मत और पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए काम शुरू किया गया। अधिकारियों की टीम स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।

खेत डूबे, घरों तक पहुंचा पानी

बांध टूटने का असर सबसे पहले आसपास की कृषि भूमि पर पड़ा है। रानी-1 पंचायत के खेतों में पानी फैलने से फसलों के डूबने की जानकारी सामने आई है। रानी-2 पंचायत में भी कृषि क्षेत्र जलमग्न हो गया है। वहीं रानी-3 पंचायत में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है।

कुछ स्थानों पर पानी आबादी के करीब पहुंच गया है। घरों के आसपास पानी फैलने के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी होने लगी है। जिन परिवारों के मकान निचले इलाकों में हैं, वे सबसे ज्यादा चिंतित हैं। कई ग्रामीण अपने मवेशियों और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं।

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि पानी का बहाव इसी गति से जारी रहा तो और अधिक घर इसकी चपेट में आ सकते हैं। खेतों में खड़ी फसलों के नुकसान के साथ-साथ घरेलू सामान और पशुधन को बचाने की चुनौती भी बढ़ सकती है।

खतरे के निशान से ऊपर गंगा

बेगूसराय में गंगा का बढ़ता जलस्तर पहले से ही प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता का कारण बना हुआ है। रविवार को हाथीदह में गंगा का जलस्तर 42.39 मीटर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई थी, जो खतरे के निशान से 0.63 मीटर ऊपर बताया गया था।

ऐसे समय में गंगा बाया नदी के जमींदारी बांध का टूटना हालात को और चुनौतीपूर्ण बना रहा है। नदी का जलस्तर और बांध से निकल रहे पानी की दिशा अब प्रभावित इलाकों के लिए महत्वपूर्ण बन गई है।

प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती

बांध टूटने के बाद प्रशासन के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती पानी के फैलाव को नियंत्रित करने और बांध की मरम्मत करने की है, जबकि दूसरी चुनौती प्रभावित आबादी को सुरक्षित रखने की है।

यदि पानी आबादी वाले निचले क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता है तो वहां नाव, सुरक्षित आश्रय स्थल, पीने का पानी, भोजन और अन्य राहत सामग्री की जरूरत पड़ सकती है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से समय रहते राहत और बचाव की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

फिलहाल जल संसाधन विभाग की टीम बांध के टूटे हिस्से पर काम कर रही है। प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित पंचायतों में पानी के फैलाव और लोगों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

आने वाले घंटे बेहद अहम

गंगा का जलस्तर पहले से ऊंचा होने और बांध टूटने के बाद पानी के नए इलाकों में पहुंचने से आने वाले कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पानी का बहाव किस दिशा में बढ़ता है और मरम्मत कार्य कितनी जल्दी पूरा होता है, इससे आगे की स्थिति काफी हद तक तय होगी।

सबसे ज्यादा नजर रानी-1, रानी-2 और रानी-3 पंचायतों के निचले इलाकों पर है। यदि पानी का फैलाव बढ़ता है तो बड़ी संख्या में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जरूरत पड़ सकती है।

फिलहाल ग्रामीणों को पानी के बढ़ते स्तर पर नजर रखने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीम मौके पर मौजूद है, लेकिन गंगा के बढ़े जलस्तर के बीच बांध टूटने की घटना ने बेगूसराय के बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिंता जरूर बढ़ा दी है।

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बांध टूटने के बाद सबसे बड़ी चुनौती क्या?

बांध टूटने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच कमजोर तटबंध कितने बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में खेतों के डूबने के बाद जब पानी आबादी की तरफ बढ़ता है तो लोगों के सामने घर, पशुधन और जरूरी सामान बचाने की चुनौती खड़ी हो जाती है।

ऐसी स्थिति में केवल बांध की मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। प्रभावित परिवारों की पहचान, सुरक्षित स्थानों की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर नावों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है। आने वाले घंटों में पानी का रुख यह तय करेगा कि स्थिति स्थानीय जलजमाव तक सीमित रहती है या बड़े इलाके को प्रभावित करती है।

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